Hindi Gay sex story – चन्दन और फौजी

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चन्दन और फौजी

ये कहानी चन्दन की आप बीती है! बचपन के मेरे दोस्तों में से एक… चन्दन! जैसा नाम, वैसा ही बदन! चिकना, मुलायम, महकता हुआ… कभी जवानी की महक, कभी पसीने की महक! चन्दन के साथ जब ये हुआ, उसके कुछ साल बाद उसने ये बात मुझे बताई!

अकेला था, गरीब था, तो इधर उधर मजदूरी कर लेता था!

एक बार, मिलिट्री एरिया के पास के, उन्ही के रेजिडेंशियल एरिया में एक दीवार टूट गई थी! दीवार तो मिस्त्री – बेलदारों (सिविलियन एरिया के) ने मिल के बना दी थी लेकिन छोटा मोटा कचरा छोड़ गए थे जैसे, मलबा, ईंटे, पत्थर वगैरह! पर वो सब इतना था कि उसे उठवाने के लिए किसी को बुलाना था! वहाँ रहने वाले ऑफिसर ने अपने अर्दली को इसका जिम्मा सौप दिया कि वो किसी को बुला से, 100 – 150 रुपये में ये सब साफ़ करवा दे! अर्दली बेचारा, क्या क्या करता! इंतज़ार करने लगा कि कोई मजदूर आता जाता दिखे तो उससे करवा ले! पर कोई मिला नहीं!

चन्दन, उन दिनों खस्ता हाल में था, तन पर कपडे भी ठीक से नहीं थे! थे ही नहीं! एक फटी सी कच्छी पहनता था, और शर्म से बचने के लिए उस पर एक गमछा सा लपेटे रहता था! उस दिन, वो उस मिलिट्री एरिया के पास से गुजरा, तो उस अर्दली को पता नहीं क्या सूझा कि चन्दन से पूछा “मजदूरी करेगा?” चन्दन ने पलट के पूछा “क्या काम है, कितना दोगे?”

अर्दली उसे कंपाउंड में ले गया और काम दिखाया! “ये सब साफ़ करना है, एक भी पत्थर या ईंट का टुकड़ा नहीं दिखना चाहिए! 100 रुपये मिलेंगे! करना है?” चन्दन ने हाँ कर दी, और उसी समय शुरू हो गया!

गमछा उतार के पास की झाड़ियों के नीचे रख दिया, पर भूल गया कि उसकी चड्ढी में पीछे की ओर 2 – 3 बड़े बड़े छेद हो रखे थे जिनसे, उसके सांवले लेकिन बहुत ही चिकने और बिना बाल के चूतड झलक रहे थे! अर्दली निगरानी के लिए वही खड़ा था! शुरू में तो चन्दन की पीठ दूसरी ओर थी लेकिन 2 – 3 बार जब वो पलटा तो अर्दली को उसकी चिकनी गांड के दर्शन हो गए! अर्दली, फौजियों जैसी आस्तीन वाली बनियान, मिलिट्री रंग की निक्कर और जूते मोज़े पहने था! लेकिन उसकी निक्कर आम फौजियों के निक्कर जैसी बहुत बड़ी और बहुत ढीली नहीं थी! शायद उसने आज अन्दर अंडरवियर भी नहीं पहन रखा था, या शायद उसके “उस” में बहुत जोर था! चन्दन के नंगे बदन और फटे कच्छे में से झांकती उसकी चिकनी गांड के तीसरे चौथे दर्शन ने तो अर्दली के निक्कर में तम्बू बनाना शुरू कर दिया था! अब वो बार बार घूम घूम कर ऐसी जगह आ जाता था जहाँ से उसे चन्दन का पिछवाड़ा आराम से दिख सके!

फिर चन्दन काफी देर से एक ही दिशा में मुह करके काम करता रहा तो, अर्दली वहीँ बैठ गया और बैठा तो निक्कर में तम्बू बनाने वाले बम्बू को तकलीफ हुई और वो साइड से सरक कर, निक्कर के एक तरफ से बाहर आ गया! इतना बाहर तो नहीं आया था कि दूर से दिख सके लेकिन अगर कोई पास खड़ा होता तो जरूर निक्कर के एक साइड से सुपाडा दिख जाता!

चन्दन को अभी भी पता नहीं था कि क्या हो रहा है! उधर अर्दली, आराम से जीती जागती सेक्स फिल्म देख रहा था! इधर उधर नजर रखते हुए, उसने निक्कर के साइड से अपना नाग देवता काफी हद तक बाहर निकाल लिया था और मजे से उसे पुचकार रहा था! हर पुचकार पर उसका नाग, फुंफकार कर फन और ऊँचा कर देता था!

तभी चन्दन एक दम से पलटा और अर्दली को अपने नाग को बिल में डालने या ढकने का मौका ही नहीं मिला! चन्दन चौंक गया, अर्दली से नजरें भी मिली! 5 – 7 सेकंड्स के लिए उन दोनों की नजरें बंध सी गई! तभी अर्दली ने अपना लंड जैसे तैसे करके अन्दर किया और चन्दन भी बिना बोले मुड़ा और फिर से काम में लग गया! पर अब वो सतर्क था! मिनट – दो मिनट में, किसी न किसी बहाने पलट लेता था! शायद उसे अभी भी याद नहीं था कि उसकी चड्ढी पीछे से फटी हुई है! लेकिन अर्दली के अध्-खड़े 7” के गोरे लंड के उस 5 – 6 सेकंड्स के दर्शन ने, और कुछ उस परिस्थिति ने चन्दन की चड्ढी में भी हलचल शुरू कर दी थी! अर्दली के मुकाबले चाहे उसका लंड नुन्नी ही दिखता हो, पर उसकी नुन्नी भी बढ़ने लगी थी! और उसे छुपाने के लिए चन्दन ने झाड़ियों में से गमछा लिया और लपेट लिया!

अर्दली को जो जीता जागता शो देखने को मिल रहा था वो बंद हो गया! उसका मुह उतर गया! 2 – 3 मिनट बाद हिम्मत करके उसने चन्दन से कह ही दिया “गर्मी नहीं लग रही क्या? गमछा उतार दो ना… कौन है देखने वाला”! चन्दन ने सुना अनसुना कर दिया! 2 – 3 मिनट बाद, अर्दली ने फिर कहा, 20 रुपये ऊपर से दिलवाऊंगा, गमछा उतार दो ना!” चन्दन ने उतार दिया!

अर्दली की हिम्मत बढ़ गई! 5 – 7 मिनट बाद वो उठा और निरिक्षण के बहाने चन्दन के पास खड़ा हो गया! उसका नाग, बिल से फिर फुंफकार मार रहा था! एक दो बार ऐसा हुआ कि चन्दन पलटा या उठा तो उसका हाथ या उसकी गांड अर्दली के खड़े लंड को छू गई! चन्दन ने ऐसा दिखाया कि कुछ हुआ ही नहीं! लेकिन उसकी नुन्नी में तो दिमाग नहीं था ना! वो इसे अनदेखा नहीं कर सकी और चन्दन के ढीले ढाले कच्छे में भी तम्बू बनने लगा!

अर्दली की हिम्मत और बढ़ गई और उसने एक दो बार हलके से हाथ से उसकी गांड को छू ही लिया! फिर उसने बोल ही दिया “और पैसे दूंगा…”! चन्दन ने पूछा “क्यों?”! अर्दली, थोडा ठरक और थोडा डर में सूखे गले से, बोला “झाड़ियों में चल… मस्ती करेंगे!” चन्दन को शायद पता था कि दो मर्द किस तरह की मस्ती करते हैं! उसने डर के मारे मन कर दिया! अर्दली फिर बोला “चल ना… 5 – 10 मिनट की ही तो बात है! अच्छा, 30 रुपये और दिलवा दूंगा!… नहीं चलेगा तो देर तक काम करवाऊँगा!” अब अर्दली का पूरा खड़ा लंड बोल रहा था! वो अब अर्दली को डर दिखाने और लालच देने के लिए भी मजबूर कर चुका था!

चन्दन चुपचाप से झाड़ियों में घुस गया! अर्दली ने इधर उधर देखा और वो भी झाड़ियों में घुस गया! झाडिया ऐसी थी कि अन्दर हलचल ना हो तो धूप में किसी को पता नहीं लगेगा कि अन्दर कोई है! अर्दली ने अन्दर आते आते साइड से अपना लंड पूरा का पूरा बाहर निकाल लिया! 7” का अध्-खड़ा लंड अब 8” का खम्बा बन चुका था! चन्दन के पास उतारने के लिए कुछ था ही नहीं! अन्दर आते ही अर्दली चन्दन के नंगे बदन को सहलाने लगा! चन्दन के लिए भी अर्दली का इतना बड़ा लंड हवस जगाने के लिए काफी था! उसने अर्दली का मोटा, गोरा लंड अपने हाथ में ले लिया! कितना भी सख्त था लेकिन बहुत ही मखमली था अर्दली का लंड! चन्दन अपने आप, उसके लंड पर हाथ ऊपर नीचे करने लगा! अर्दली ने शायद लड़के तो क्या किसी लड़की के साथ भी बहुत दिनों से कुछ नहीं किया था! चन्दन के सख्त हाथ जब उसके लंड की मक्खन जैसी चमड़ी पर ऊपर नीचे हुए तो अर्दली के तन बदन में आग लग गई! उसने एक झटके में अपनी बनियान खोल दी और ठरक से कांपते हाथों से अपनी निक्कर के बटन्स खोलते हुए निक्कर नीचे गिरा दी! अब न अर्दली के बदन पर कुछ था और न चन्दन के! कभी मजदूरी और कभी फाके, इसलिए चन्दन के बदन पर कभी चर्बी चढ़ी ही नहीं! चूतड़ों पर भी ऐसी कोई चर्बी नहीं थी! उधर अर्दली, फौजी था इसलिए उसके बदन पर भी कहीं चर्बी नहीं थी… थी तो बस गांड पर! ऐसी दूध सी गोरी, भरी भरी गांड… कि कोई भी सहलाए बिना ना रहे! अर्दली झुका और चन्दन की छाती को मसलने लगा! फिर उसका एक निप्पल मुह में ले लिया और ऐसे चूसने लगा जैसे किसी लड़की के अर्ध-विकसित मम्मे चूस रहा हो! अब चन्दन की बारी थी सिसकियाँ भरने की! अर्दली ऐसा कुछ नहीं करना चाहता था कि चन्दन को दर्द हो जिससे वो चीखे चिलाये या दर्द बर्दाश न होने की वजह से भाग जाए! वो बड़े प्यार से चन्दन के छोटे छोटे मम्मे चूसने लगा! एक बार में दायाँ मुह में लेना और बाँया हाथ से मसलना और फिर दायाँ हाथ में और बाँया मुह में!

चन्दन के हाथ खाली थे, तो वो भी झुकते हुए, अर्दली के खम्बे को प्यार करने लगा! बीच बीच में उसका हाथ अर्दली के आंड भी सहला देता! उसने अपनी पूरी ज़िन्दगी में इतने बड़े आंड किसी इंसान के नहीं देखे थे! (खुले में शौच जाने की वजह से चाहे अनचाहे बहुत कुछ दिख ही जाता है) हाँ, घोड़े के आंड जरूर याद आ गए थे, उस अर्दली के आंड देख कर!

खैर… उधर अर्दली ने चूस चूस कर, धूप में सांवली हुई चन्दन की छाती पर कई निशान बना दिए थे! निशान इतने गहरे थे कि सांवली छाती पर भी आराम से दिख रहे थे! दोनों की साँसे इतनी गरम थी कि सहन नहीं हो रही थी एक दूसरे से!

अर्दली सांस लेने के लिए रुका तो चन्दन वहीँ बैठ कर उसके लंड को सहलाने लगा! अर्दली ने चन्दन का सर पकड़ा और हलके से अपने खड़े लंड की ओर ले गया! चन्दन भी अपने आप को रोक नहीं पाया और मुह खोल कर अर्दली के लंड के नीबू जैसे सुपाडे को मुह में ले लिया! एक दम साफ़… न पसीने की बदबू, न पिशाब की और ना ही कोई गन्दगी! मर्दानी महक से भरा मर्दाना लंड! चन्दन की लार और अर्दली के लंड की मखमली चमड़ी, काफी थी… उसका लंड अपने आप चन्दन के मुह में फिसलता चला गया, और फिर बस उसके हलक की दीवारों से टकरा कर ही रुका!

अर्दली इतना गरम हो चुका था, कि अपने आप ही चन्दन के मुह में अपने लंड को अन्दर बाहर करने लगा! कई बार तो इतना बेकाबू हो गया कि चदन को उसका लंड अपने हलक से भी नीचे उतरता महसूस हुआ! चन्दन को उलटी सी आने को हुई! अर्दली को पता था कि उलटी हुई तो आवाज़ आएगी! उसने झट से लंड बाहर कर लिया! और फिर प्यार से कम स्पीड में अपना लंड चन्दन के होंठों से होते हुए अन्दर बाहर करने लगा!

चन्दन का मुह थक गया था! थोड़ी देर के लिए रुक गया! पता नहीं अर्दली को क्या सूझा, उसने चन्दन को गोद में उठाया, उल्टा किया और उसकी टाँगे अपनी गर्दन के चारों ओर लपेट ली और खड़े खड़े ही चन्दन का लंड अपने मुह में भर लिया! चन्दन इतना हल्का नहीं था पर फौजी तो कुछ भी उठा लेते हैं! चन्दन, अर्दली की बाहों में हवा में उल्टा लटका हुआ था! उसका मुह अर्दली के आंडों के पास आ रहा था! उसने जीभ निकाली और अर्दली के अच्छे से शेव किये हुए आंडों को चाटने लगा! उधर ऊपर, अर्दली कभी चन्दन के लंड को मुह में लेता, कभी चन्दन की गोटियों को और कभी आगे हो कर, मर्दाने पसीने की महक में डूबे चन्दन के गांड के छेद को जबान की नोक से कुरेद देता! जब चन्दन के गाने के छेद पर अर्दली की जबान लगती तो उसकी गांड कुलबुला उठती और उसकी गांड के छेद के छल्ले अपने आप सिकुड़ने – खुलने लगते! उधर चन्दन का मुह खुल जाता और उसमे से दबी सी सिसकारी निकल जाती!

अब शायद, फौजी का अपने आप पर और अपने लंड पर कंट्रोल चुकने लगा था! उसने चन्दन को नीचे उतारा! चन्दन का गमछा और अपना बनियान वही बिछाया और पीठ के बल लेट गया! चन्दन समझा नहीं, और फिर झुक कर अर्दली के लंड को चूसने लगा! थोड़ी देर तो अर्दली ने ये फिर से होने दिया पर फिर वो उठा, चन्दन को रोका और इशारे से चन्दन को अपने खड़े लंड पर बैठने को कहा! चन्दन की गांड, अर्दली इतनी गीली कर चुका था कि कोई के. वाई. जेली भी क्या करेगी! फिर जब चन्दन की टाँगे फैली तो छेद अपने आप ही खुल गया! उधर अर्दली का खम्बा भी चन्दन का थूक से लिपटा था! थोड़ी सी मशक्कत, थोड़ी सी आह ऊह, थोड़े से दर्द में भींचे दांतों के साथ, अर्दली के लंड का ‘नीबू’, चन्दन की गांड के बिना बालों वाले छेद के अन्दर हो ही गया! चन्दन के आँखे फ़ैल कर ऐसे बड़ी हो गई जैसे बाहर ही आ जायेगी! अर्दली थोडा रुका… जैसे किसी ने उसे स्टेचू बोल दिया हो! 7 – 8 सेकंड्स के बाद, जब उसने देखा कि चन्दन का चेहरा नार्मल हो गया है, तो उसने चन्दन को और थोडा नीचे किया और अपने लंड का एक और इंच, चन्दन की गांड में सरका दिया! अब चन्दन की गांड खुद से खुलने लगी! पर अन्दर कोई चिकनाहट नहीं थी! इंसानी जिस्म की जो कुदरती चिकनाहट होती है, वही काम आ रही थी! धीरे धीरे, थोडा अन्दर, थोडा बाहर करते हुए, फौजी ने चन्दन की गांड को 4 – 5 इंच की गहराई तक खोल लिया! जैसी चन्दन की गांड, वैसी ही उसकी गांड की दीवारें! मुलायम! फौजी के ऐसा लग रहा था जैसे किसी कन्या की चूत की दीवारें हो! उसे जन्नत का सा मजा आने लगा था! और शायद चन्दन को भी, क्योंकि वो भी अब खुद ही अर्दली के लंड पर ऊठक बैठक सी कर रहा था, और खुद ही अपनी गांड में इंच इंच करके, अर्दली के लंड के लिए जगह बनाए जा रहा था! कुछ ही मिनिटों में, चन्दन के चूतड, अर्दली के घोड़े जैसे गोल गोल, बड़े बड़े आंडों पर टिकने लगे और चन्दन की गांड की अंदरूनी दीवारों की मखमली चमड़ी को, अर्दली का लंड 8 – 8.5 इंच तक सहला रहा था! मतलब, अब अर्दली का पूरा का पूरा लंड, चन्दन की गांड में था!

वासना के मारे, चन्दन की आँखें मुंद सी गई थी, और अर्दली भी शायद भूल गया था कि वो झाड़ियों में था और उसकी हवस भरी ठरकी आवाजें बाहर तक आ रही थी! चन्दन की टाँगे जवाब देने लगी थी इसलिए वो वहीँ, अर्दली के आंडों पर ही बैठ गया! जन्नत की सैर में रुकावट? अर्दली ने चन्दन को अपने ऊपर से उठाया और जमीन पर घोड़ी बना दिया! और खुद घोडा बन कर उस पर चढ़ गया! पर चूंकि चन्दन की गांड में अब जगह बन चुकी थी तो इस बार ना तो अर्दली को परेशानी हुई और ना ही चन्दन को दर्द! एक झटके में अर्दली का लंड जड़ तक चन्दन की गुफा में खो गया!

धकम पेल फिर शुरू थी! पर इस बार, चन्दन और अर्दली की आवाजें नहीं, अर्दली के आंड और चन्दन की गांड आवाज़ कर रहे थे! फट फट धक्कों में, अर्दली के आंड, चन्दन की गांड पर चांटे से मार रहे थे और दोनों की टाँगे आपस में टकरा रही थी जिससे पट – पट, फट – फट जैसी आवाजें आ रही थी!

फिर फौजी का बदन भी थकने लगा! उसने चन्दन को धकेल कर वैसे ही लिटा दिया और खुद भी उसी के ऊपर लेट गया! चन्दन ने टाँगे चौड़ी कर ली और अर्दली के लंड को फिर रास्ता मिल गया! अब चन्दन को भी शायद बहुत, बहुत बहुत, मजा आ रहा था तभी तो उसने खुद टाँगे फैलाई थी!

अब अर्दली, उछल उछल कर, पूरा लंड बाहर निकालता और फिर पूरा का पूरा अन्दर पेल देता! ऐसे करने से एक ही झटके में उसके पूरे लंड को मालिश मिल रही थी और हर झटका उसे, चरम के पास ले जा रहा था! फिर आखिर में वो मिनट आ ही गया जब फौजी से भी रुका नहीं गया और वो वहीँ, चन्दन की गांड में अपना लंड छोड़े हुए, चन्दन पर ही पसर गया! वो पसरा और अर्दली के लंड ने माल छोड़ना शुरू कर दिया! शायद हफ़्तों से अर्दली ने मुठ भी नहीं मारी थी! क्योंकि चन्दन को लग रहा था कि शॉट पे शॉट, शॉट पे शॉट… उसकी गांड में अन्दर अर्दली के माल के शॉट पे शॉट लग रहे थे! करीब 15 – 20 शॉट के बाद अर्दली के लंड का थूकना रुका! अर्दली धीरे से उठा और जब उसका लंड, चन्दन की गांड में बने वीर्य के कुवे से बाहर निकला तो पच्च की आवाज़ आई! चन्दन एक दो मिनट वैसे ही पड़ा रहा! तब तक अर्दली ने बनियान पहन ली थी और निक्कर की अन्दर वाले हिस्से से अपना लंड पौंछ लिया था! चन्दन उठा और जैसे ही खड़ा हुआ, ‘पर्रर’ करके उसकी गांड से, अर्दली के वीर्य की धर बन गई! गनीमत थी कि उसके गमछे पर नहीं गिरी! उसने अपनी चड्ढी से, टाँगे फैला कर, अच्छे से अपनी गांड को पौंछा! फिर बिना चड्ढी पहने ही गमछा लपेट लिया और चड्ढी की तह करके उसे गमछे में अन्दर की ओर दबा लिया!

दोनों ने जब देखा कि वो अब बाहर निकलने के लायक हैं, तो अर्दली बोला “चल, तुझे 100 की बजाय, 200 रुपये दिलवाता हूँ साब से…”! चन्दन बोला “नहीं, 100 की तय हुई थी, 100 ही दिलवा दो! मैंने ये सब मजे के लिए किया है, पैसे के लिए नहीं! ऐसे पैसे के लिए ये सब करने लगा तो किसी दिन रंडी बन जाऊँगा! और कुछ काम भी बाकी पड़ा है, वो कर लूं, फिर पैसे दिलवा देना!”

“ठीक है, पर अभी मेरी ड्यूटी ख़त्म हो रही है! तुम काम पूरा करो, मैं जाते जाते साब को बोल जाऊँगा, वो तुमको पैसे दे देंगे!” अर्दली बोला! चन्दन अपना काम ख़त्म करने में लग गया!

काम पूरा होते होते, शाम के 5 बज गए थे! हाथ मूह धो कर उसने साब के घर की घंटी बजाई! साब बाहर आये तो चन्दन देखता रह गया! साब थे तो बड़ी उम्र के, लेकिन कसा बदन, बालों से भरा! शायद अभी अभी सो कर उठे थे, क्योंकि वो सिर्फ हाफ पैन्ट्स में थे और बाकि का बदन नंगा था!

“अन्दर आ जाओ”, साब बोले! चन्दन सकपका कर अन्दर चला आया!

“दोपहर में झाड़ियों में बहुत हलचल हो रही थी…” साब बोले! चन्दन के होश उड़ गए!

“उस समय तो मैंने डिस्टर्ब नहीं किया… सोचा एक साथ दो दो को तुम संभाल नहीं पाओगे… क्या बोलते हो? जितना अर्दली ने दिया, मैं उसका तीन गुना दूंगा! मंजूर है?” साब ने सीधे सीधे ऑफर दिया!

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फिर? फिर क्या हुआ? अगली कहानी में… कब? मुझे भी नहीं पता! देखते हैं!

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