Hindi Gay sex story – गे रेप स्टोरी – भाग २

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इस बार भगवान ने मेरी सुन ली, लेकिन वो क़िस्सा बाद को। अभी तो क्रमानुसार बताऊँगा।

वो आया। इतने दिन घर पर रहते, पड़े-पड़े खाते टीवी देखते उसका रंग और निखर आया था, जिस्म थोड़ा भारी हो गया था, लेकिन गन्ना कितना भी मोटा हो, बरगद का पेड़ तो बन नहीं जाएगा। एक बैग में एक दिन का सामान और डॉक्यूमेंट थे। वो रखा। बैठे, चाय बनाई, चाय नाश्ता किया, टीवी देखा। फिर उसने बोला नहा लेता हूँ। मैंने सोचा नेकी और पूछ पूछ। उसने अपने दोस्तों के रूम के स्टायल में ही मेरे सामने ही अपनी शर्ट पैंट और सफ़ेद बनियान उतारी। अगर उसको मेडिकल कॉलेज की क्लास में ले जाते तो प्रोफ़ेसर उसके जिस्म को दिखा कर ही छात्रों को जिस्म की एक-एक हड्डी के बारे में पढ़ा सकते थे। लेकिन क्या गोरा बदन था। अनछुई जवानी का यह आकर्षण तो कभी कम नहीं होता। अब वो एक भूरी, लेग्स वाली बॉक्सर अंडी में था जिसमें से उसके ठंडा लंड का ढूँढने पर भी अंदाज़ा नहीं हो रहा था। मैंने कहा कि बे, 19 साल में भी तेरा ऐसा गुमनाम हथियार है तो तेरी बीवी दीपक और पवन के पास जाने वाली है। वो हँसा। बोला, अच्छा है, मुसीबत ख़त्म। मैं भी हँसा। उसकी बगलों में बालों का गुच्छा था, लेकिन सीना एकदम 14 साल के बच्चे की तरह एकदम चिकना था, कहीं कोई बाल नहीं। बॉक्सर इतनी ऊपर पेट तक चढ़ी हुई थी कि वहाँ भी कोई बाल नज़र नहीं आए। टाँगे भी एकदम चिकनी।

उसने बैग से तौलिया और एक नई चड्ढी निकाली, वो भी उसकी पहनी हुई चड्ढी की जुड़वा बहन ही थी, भूरी, लेग्ज़ वाली बॉक्सर। मैंने बोला साले, कट ब्रीफ़ क्यों नहीं पहनता। उसने कुछ बोला कि अक्सर गाँव के कुवें पर, या घर की ट्यूबवेल पर नहाना पड़ता था, तो गाँव में सभी ऐसी ही पहनते थे। मैंने बोला मेरी कट ब्रीफ़ पहने ले। उसने कोई जवाब नहीं दिया और चश्मा उतार के रखा और नहाने चला गया।

उसने मेरे सामने कपड़े उतारे थे। मेरी हाथ की पहुँच की दूरी में ही रहा था। उसकी तमाम गैर-सेक्सी बातों के बाद भी मुझे कुछ-कुछ होने ही लगा था। 19 साल का गोरा जवान अनछुआ कुँवारा लड़का, बस एक चड्ढी में मेरे सामने डोला था। ये कुछ-कुछ आपने बहुत सुना होगा कि होता है, आज इसका राज़ खोल देता हू। मुझे कुछ-कुछ होने लगा था का मतलब है कि मेरा लंड खड़ा होने लगा था। मैंने टीवी पर एफ़टीवी चैनल लगाया जो उन दिनों अकेला चैनल था जिस पर कम से कम कपड़ों में लड़कियाँ दिख जाती थीं।

वो नहा कर आया। वो तौलिया लपेटे था। पिछली अंडीज़ धुली हुई उसके हाथ में थी, पूछा कहाँ डालूँ। मैंने बाहर तार की ओर इशारा किया। उसने अंडीज़ को उस पर फैलाया और वापस आ गया। मेरे एकदम पास खड़ा था। मैंने धीरे से हाथ बढ़ा कर उसकी तौलिया खोल दी। उसने कोई प्रतिरोध नहीं किया, प्रतिक्रिया तक नहीं दी। मैंने गीली तौलिया को एक सोफ़ा चेयर की पीठ पर फैला दिया। वो वहीं खड़ा था, बस एक भूरी, लेग्ज़ वाली बॉक्सर में। बालों और बदन को उसने ऐसे ही पोछा था तो वो अभी भी गीले थे और बालों से पानी की कुछ बूँदे सोफ़े पर टपक जाती थीं। या उसके बदन पे ही ऊपर से नीचे तक जा कर उसकी अंडीज़ में जज़्ब हो जाती थीं। मैंने उसका हाथ पकड़ कर उसको सोफ़े पर अपने बगल में बिठा लिया। वो बैठ गया। हम दोनों एफ़टीवी देख रहे थे। अधनंगी मॉडलें रैंप पर चल रही थीं। बढ़िया बीट्स वाला संगीत गूँज रहा था।

मेरा दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा था। मैं अपनी घड़कनों को अपने शरीर में महसूस कर सकता था, अपने कानों से सुन रहा था। उसकी तथाकथित बदसूरती (नहीं, बदसूरत तो वो नहीं था, बस सेक्स्युअली स्टीम्युलेटिंग नहीं था) अब मन से निकल गई थी और मैं उसकी अधनंगी अनछुई जवानी में मदहोश हो रहा था। उसके बदन से साबुन की ख़ुश्बू आ रही थी जो उसके बदन की अपनी ख़ुश्बू लग रही थी।

मेरा लंड मेरी पैंट के भीतर टन्नाया खड़ा दर्द कर रहा था। लेकिन मेरे ध्यान में दीपक और पवन के साथ मेरी नाक़ाम क़ोशिशें भी घूम रही थीं, और उनका जनरलाइज़ेशन कि उनके साथ कुछ नहीं हो पाया, तो इससे भी कुछ नहीं होना था, और वैसे भी एक साल में उसकी तरफ़ से कोई रुचि नहीं दिखी थी, सेक्स्युली इंट्रेस्ट की।

मेरा लंड प्रीकम छोड़ रहा था जिसका गीलापन मैं अपनी चड्ढी में महसूस कर रहा था, मेरी साँस भारी हो गई थी। वो बगल में बैठा इस सबसे अन्जान टीवी देख रहा था। समय ठहर गया था। सब्र की सीमा पार हुई। और मैंने अपनी बाँह बढ़ा कर उसके कंधों पर रखी, और उसको अपनी ओर खींचा। वो झुका चला आया, और उसका सर मेरी गोदी में आ गया, मैं सोफ़े की पीठ पर चौड़िया के टिक गया। उसने पैर ऊपर किए और वो सोफ़े पर ही पूरा लेट गया। उसका सर मेरी गोद में रखा था, मेरा खड़ा लंड उसके सर पे चुभ रहा होगा, क्या वो समझ पा रहा होगा कि यह कड़ा कड़ा गरम गरम क्या है। उसने आँखे बंद कर ली थीं। और फिर मैंने अपनी एक अँगुली को उसके पूरे चेहरे पर फेरा। उसके गालों पर, उसके कानों पर, उसकी भवों और बंद आँखों की पुतली पर, उसके पतले गुलाबी नरम होंठों पर, उसकी ठुड्डी पर और फिर उसके गले पर फिराते हुए उसके सीने पर। वहाँ पर उसके बालों से टपकी पानी की एक बूँद अटकी हुई थी। मैंने अपनी अँगुली को उस बूँद में डुबोया, और उस बूँद को नीचे की ओर रास्ता दिखाया, उसके नर्म मुलायम चिकने सीने से नीचे पहुँचा, उसके पेट पर पहुँचा, एक घाटी ने रास्ता रोका जो कि उसकी नाभी थी, उसमें उतर कर मेरी अँगुली फिर ऊपर आई, और फिर नीचे उसके पेट पर और नीचें गई। अब कुछ छोटे मुलायम रोवों का एहसास हुआ। और फिर एक रुकावट आई जो कि उसकी बॉक्सर का इलास्टिक था। मेरी अँगुली ने इलास्टिक की परिधि में घूम कर कोई दरवाज़ा ढूँढने की क़ोशिश की जो नहीं मिला, लेकिन जब उसने साँस छोड़ी तो इलास्टिक में एक जगह मेरी अँगुली घुस ही गई, और फिर पूरा हाथ घुस गया। उसका पूरा बदन बार-बार थरथरा जा रहा था। और फिर मेरा हाथ मोटे, घने लेकिन मुलायम बालों के एक जंगल में से गुज़रता हुआ एक गरम कड़क बेलन पर पहुँचा जहाँ से आगे कोई रास्ता नहीं मिला। उसका बदन बहुत ज़ोर से काँपा।

वो उसका लंड था, जिसे मैंने अपने हाथ में भर लिया। पतला लंड, लेकिन एकदम कड़क टन्नाया हुआ, जवानी के जोश में फड़कता हुआ, चार-पाँच इंच के दर्मियान होना। लेकिन इतना सॉलिड कि मुड़ने पर ना मुड़े। एकदम सीधा। आगे सुपाड़े पर थोड़ा मोटा। खाल सुपाड़े पर आधी पीछे हट चुकी थी और मेरे ज़रा से छूने पर आराम से पीछे सरक गई। हुँम, तो छोरा मुट्ठ तो मारता ही था। और फिर मेरी अँगुली उसके सुपाड़े पर उसके प्रीकम के गीले चिपचिपे तलाब में तर हो गई।

मैंने उसके लंड को उसकी बॉक्सर से बाहर निकाल लिया। और मैं उसको दबाने, मरोड़ने, हिलाने लगा। वो अपनी बगल पर हो गया था, उसने अपना चेहरा मेरी गोद की तरफ़ मोड़ लिया था। उसका चेहरा एकदम मेरे टन्नाए लंड पर टिका हुआ मेरे लंड पर दबाव डाल रहा था जिसका अब तक तो उसको एहसास हो ही गया होगा कि यह क्या है। उसकी गर्म भारी साँसें मेरी पैंट और अंडीज़ से ग़ुज़र कर मेरे लंड तक पहुँच रही थीं। मेरा लंड प्रीकम के धारे पे धारे छोड़े जा रहा था। मेरा दूसरा हाथ उसके बालों को और उसकी ऊपरी बाँहों और उसके सीने और उसके निप्पलों को सहला रहा था, दबा रहा था, नाखून गड़ा रहा था, मरोड़ रहा था। मेरा पहला हाथ उसके लंड से क़ुश्ती लड़ रहा था।

और चार के बाद शायद पाँचवा स्ट्रोक शुरु ही हुआ होगा कि वो ज़ोर से काँपा, उसका मुँह खुला और उसने मेरे टन्नाए लंड को मेरी पैंट और अंडीज़ के ऊपर से अपने मुँह में दबा लिया, और मेरी अगली बाँह पर एक पिकचारी की पतली सी चिपचिपी गरमागरम धार पड़ी। और उसका माल निकलने लगा था। मैंने दूसरे हाथ से उसके सीने के निप्पल वाले हिस्से को अपनी मुटठी में भर के दबाया और मरोड़ा, पहले हाथ से उसके लंड को ज़ल्दी जल्दी, ज़ोर से दबा के हिलाया। उसकी दो-तीन धारें और निकलीं जो कि बूँदें ही थीं।

और उसका माल निकलना बंद हो गया। हम दोनों की साँसे अभी भी भारी, गहरी चल रही थीं। कुछ देर में उसके मुँह ने मेरे लंड पर से पकड़ छोड़ी और फिर वो सीधा हो गया। उसके चेहरे पर एक बहुत ही प्यारी सी मुस्कराहट थी। उसकी आँखे खुलीं और उसकी नज़रों में सारी दुनिया का प्यार भरा हुआ था। वो थोड़ा शर्मा भी रहा था। मैंने सिर नींचे झुका कर उसके होंठों को चूमा, पूरे चेहरे को चूमा और फिर होंठों को चूमा बहुत देर तक। वो भी मेरे होंठों को चूम रहा था।

मैंने अपनी जेब से रुमाल निकाला और उससे अपनी बाँह हथेली पर बिखरे उसके माल को पोंछा। मैंने अपनी बाँहे बढ़ा कर उसकी बॉक्सर को उतार दिया, उसने कूल्हे ऊपर किए टाँगे मोड़ीं और बॉक्सर उसके बदन से अलग हो गई। अब वो एकदम नंगा था। मेरे दोनों हाथ उसके पूरे बदन को सहलाने लगे।

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