Gay sex story Hindi – सुशील और चरणदास 3

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अगले दिन।

चरणदास : सुशील।भगवान् को सुंदर भक्त आकर्षित करता हैं। अत: तुम्हें श्रृंगार करना होगा।परंतु विधि के अनुसार यह श्रृंगार शुद्ध हाथों से होना चाहिये।मैंने ऐसा पहले इसलिये नहीं कहा कि शायद तुम्हें लज्जा आये।

सुशील: चरणदास जी।मैंने तो आपसे पहले ही कहा था कि मैं भगवान के काम में कोई लज्जा नहीं करूँगा।

चरणदास : तो मैं तुम्हारा श्रृंगार खुद अपने हाथों से करूँगा।

सुशील: जी चरणदास जी।

चरणदास : तो जाओ।पहले दूध से स्नान कर आओ।

सुशील दूध से नहा आया।

चरणदास ने श्रृंगार का सारा सामान तैयार कर रखा था।सुशील ने बनियान और लुंगी पहना था।

चरणदास : आओ सुशील।

चरणदास और सुशील आमने सामने ज़मीन पर बैठ गये।चरणदास सुशील के बिलकुल पास आ गया

चरणदास : तो पहले आँखों से शुरु करते हैं।

चरणदास सुशील के काजल लगाने लगा।

चरणदास : सुशील।एक बात कहूँ?

सुशील: कहिये चरणदास जी।

चरणदास : तुम्हारी आँखें बहुत सुंदर हैं।तुम्हारी आँखों में बहुत गहराई है।

सुशील शरमा गया।

चरणदास : इतनी चमकीली।जीवन से भरी। प्यार बिखेरती।कोई भी इन आँखों से मन्त्र मुग्ध हो जाये।

सुशील कुछ बोला नहीं।थोड़ा मुसकुरा रहा था ।उसे अच्छा लग रहा था।

काजल लगाने के बाद अब गालों पे पाउडर लगाने की बारी आई ।

चरणदास ने सुशील के गालों पे पाउडर लगाते हुए कहा।

चरणदास : सुशील।एक बात कहूँ?

सुशील: जी।कहिये चरणदास जी।

चरणदास : तुम्हारे गाल कितने कोमल हैं।जैसे की मखमल के बने हो।इन पे कुछ लगाते हो क्या।

सुशील: नहीं चरणदास जी।केवल नहाते वक़्त साबुन लगाता हूँ।
चरणदास सुशील के गालों पे हाथ फेरने लगा।
चरणदास : सुशील।तुम्हारे गाल छूने में इतने अच्छे हैं कि.. इन्हें..
सुशील: इन्हें क्या चरणदास जी?
चरणदास : इन गालों का चूमने को दिल करे।
सुशील थोड़ा सा मुसकुराया ।अंदर से उसे बहुत अच्छा लग रहा था।

चरणदास : और एक बार चूमने ले तो छोड़ने का दिल ना करे..एक बात पूछूं?
सुशील: पूछिए चरणदास जी।
चरणदास : क्या किसी ने आज तक तुम्हें चूमा है?
सुशील: नहीं चरणदास जी
चरणदास : मैंने तुम्हारे लिये खास जड़ी बूटियों का तेल बनाया है। इससे तुम्हारी त्वचा में निखार आयेगा।तुम्हारी त्वचा बहुत मुलायम हो जाएगी।तुम अपने बदन पे कौनसा तेल लगाते हो।?

सुशील ‘बदन’ का नाम सुनके और सेंसुअस फ़ील करने लगा।

सुशील: जी।मैं बदन पे कोई तेल नहीं लगाता।

चरणदास : चलो कोई नहीं।अब ज़रा घुटनो के बल खड़ा हो जा

अब सुशील घुटनो पे था।चरणदास भी घुटनो पे हो गया।सुशील के पेट पे तेल लगाने लगा।अब वो सुशील के पीछे आ गया।और सुशील की पीठ और कमर पे तेल लगाने लगा।
चरणदास : सुशील तुम्हारी कमर कितनी लचीली है।तेल के बिना भी कितनी चिकनी लगती है।

चरणदास सुशील के बिलकुल पीछे आ गया।दोनो घुटनो पे थे।

सुशील के चूतड़ और चरणदास के लंड मैं मुश्किल से 1 इंच का फ़ासला था।चरणदास पीछे से ही सुशील के पेट पर तेल लगाने लगा।वो उसके पेट पर लंबे लंबे हाथ फेर रहा था।

चरणदास : सुशील।तुम्हारा बदन तो रेशमी है।तुम्हारे पेट को हाथ लगाने में कितना आनंद आता है।ऐसा लग रहा है की शनील की रजायी पर हाथ चला रहा हूँ।

चरणदास पीछे से सुशील के और पास आ गया।उसका लंड सुशील की चूतड़ को टच कर रहा था।चरणदास सुशील की नाभि में अंगुली घुमाने का लगा।

चरणदास : तुम्हारी नाभि कितनी चिकनी और गहरी है।

चरणदास एक हाथ सुशील के पेट पर फेर रहा था।और दूसरे हाथ की अंगुली सुशील की नाभि में घुम्मा रहा था।सुशील के पेट पर लंबे लंबे हाथ मारते वक़्त चरणदास दो तीन अंगुलियाँ सुशील के बनियान के अंदर भी ले जाता।तीन चार बार उसकी अंगुलियाँ सुशील के निप्पलों को टच करी ।सुशील गरम होता जा रहा था।
चरणदास : सुशील।अब हमारी पूजा आखरी चरनो में है।विधि के अनुसार ज्ञानियों ने  कुछ आसन बताये हैं।लेकिन यह आसन तुम्हें मेरे साथ लेने होंगे ।परंतु हो सकता है मेरे साथ आसन लेने में तुम्हें लज्जा आये।

सुशील: आपके साथ मुझे कोई आपत्ति नहीं है।
चरणदास : तो तुम मेरे साथ आसन लोगे ?
सुशील: जी चरणदास जी।
चरणदास : लेकिन आसन लेने से पहले मुझे भी बदन पर तेल लगाना होगा और यह तुम्हें लगाना है।
सुशील: जी चरणदास जी।
यह कह कर चरणदास ने तेल की बोतल सुशील को दे दी और वो दोनो आमने सामने आ गये।दोनो घुटनो पर खड़े थे।
सुशील ने चरणदास की चेस्ट पर तेल लगाना शुरु किया.
सुशील पहले भी चरणदास के बदन से आकर्षित हो चूका था।आज चरणदास के बदन पर तेल लगाने से उसका बदन और चिकना हो गया।वो चरणदास की छाती, पेट, बाहों और पीठ पर तेल लगाने लगा।वह अंदर से चरणदास के बदन से लिपतना चाह रहा था।सुशील भी चरणदास के पीछे आ गया।और उसकी पीठ पर तेल मलने लगा।फिर पीछे से ही उसके पेट और छाती पर तेल मलने लगा।सुशील का लंड हलके हलके चरणदास की गांड से टच हो रहां था ।सुशील ने भी चरणदास की नाभि में दो तीन बार अंगुली घुमायी।

चरणदास : चलो।अब आसन ले।।पहले आसन में हम दोनो को एक दूसरे से पीठ मिला कर बैठना है।

चरणदास और सुशील चौकड़ी मार के और एक दूसरे की तरफ़ पीठ करके बैठ गये।फिर दोनो पास पास आये जिससे कि दोनो की पीठ मिल जाये।चरणदास की पीठ तो पहले ही नंगी था क्योंकि उसने सिर्फ लुंगी पहनी था।सुशील बनियान और लुंगी में था।उसने भी बनियान उतार दिया था.दोनो पीठ से पीठ मिला कर बैठ गये।

चरणदास : सुशील।अब हाथ जोड़ लो।

चरणदास हलके हलके सुशील की पीठ को अपनी पीठ से रगड़ने लगा।दोनो की पीठ पर तेल लगा था।इसलिये दोनो की पीठ चिकनी हो रही था।सुशील भी हलके हलके चरणदास की पीठ पर अपनी पीठ रगड़ने लगा।

चरणदास : चलो।अब घुटनो पर खड़े होकर पीठ से पीठ मिलानी है।

दोनो घुटनो के बल हो गये।एक दूसरे की पीठ से चिपक गये।इस पोजीशन में सिर्फ पीठ ही नहीं दोनो के चूतड़ भी चिपक रहे थे ।

चरणदास : अब अपनी बाहें मेरी बाहों में डाल के अपनी तरफ़ हलके हलके खींचो।

दोनो एक दूसरे की बाहों में बाहों डाल के खींचने लगे।दोनो की नंगी पीठ और चूतड़ एक दूसरे की पीठ और चूतड़ से चिपक गए ।चरणदास अपनी चूतड़ सुशील की चूतड़ पर रगड़ने लगा।सुशील भी अपनी चूतड़ चरणदास की चूतड़ पर रगड़ने लगा।
सुशील की गांड गरम होता जा रही था।

चरणदास : सुशील।क्या तुम्हें मेरी पीठ का स्पर्श सुखदायी लगा रहा है?
सुशील: हाँ चरणदास जी।आपकी पीठ का स्पर्श बहुत सुखदायी है।

चरणदास : और नीचे का?
सुशील समझ गया चरणदास का इशारा चूतड़ की तरफ़ है।

सुशील: हाँ चरणदास जी।
दोनो एक दूसरे के चूतड़ को रगड़ रहे थे।
चरणदास : सुशील।तुम्हारे चूतड़ भी कितने कोमल लगते हैं।मेरे चूतड़ तो थोड़े कठोर हैं।
सुशील: चरणदास जी। बड़े आदमियों के थोड़े कठोर ही अच्छे लगते हैं।
चरणदास : अब मैं पेट के बल लेटता हूँ .तुम मेरे ऊपर पेट के बल लेट जाना।
सुशील: जी चरणदास जी।

चरणदास ज़मीन पर पेट के बल लेट गया और सुशील चरणदास के ऊपर पेट के बल लेट गया।सुशील का नंगा पेट चरणदास की नंगी पीठ से चिपका हुआ था।सुशील खुद ही अपना पेट चरणदास की पीठ पर रगड़ने लगा।

चरणदास : सुशील।तुम्हारे पेट का स्पर्श ऐसे लगता है जैसे की मैंने शनील की रजायी ओढ़ ली हो। अब मैं सीधा लेटता हूँ और तुम मुझ पर पेट के बल लेट जाओ।लेकिन तुम्हारा मुंह मेरे चरणो की और मेरा मुंह तुम्हारे चरणो की तरफ़ होना चाहिये।

चरणदास पीठ के बल लेट गया और सुशील चरणदास के ऊपर पेट के बल लेट गया।सुशील की टांगें चरणदास के चेहरे की तरफ़ थी ।सुशील की नाभि चरणदास के लंड पर था।वह उसके खड़ा लंड को महसूस कर रहा था।चरणदास सुशील की टांगों पर हाथ फेरने लगा।
चरणदास : सुशील।तुम्हारी टांगें कितनी अच्छी हैं।

चरणदास ने सुशील का लुंगी ऊपर चढ़ा दिया और उसकी जांघें मलने लगा।उसने सुशील की टांगें और चौड़ी कर दी ।सुशील का अंडरवियर साफ़ दिख रहा था।चरणदास सुशील के लंड के पास हलके हलके हाथ फेरने लगा।लंड के पास हाथ लगने से सुशील और भी गरम हो रह  था।

चरणदास : चलो।अब मैं बैठता हूँ।और तुम्हें सामने से मेरे कंधों पर बैठना है।मेरा सिर तुम्हारी टांगों के बीच में होना चाहिये।

सुशील: जी।

सुशील ने चरणदास का सिर अपनी टांगों के बीच लिया और उसके कंधों पर बैठ गया।

इस पोजीशन में सुशील की नाभि चरणदास के लिप्स पर आ रही था।चरणदास अपनी जीभ बाहर निकाल के सुशील की नाभि में घुमाने लगा।सुशील को बहुत मज़ा आ रहा था।

चरणदास : सुशील।तुनहारि नाभि कितनी मीठी और गहरी है।।क्या तुम्हें यह आसन अच्छा लग रहा है।
सुशील: हाँ चरणदास जी।यह आसन बहुत अच्छा है।
चरणदास : क्या किसी ने तुम्हारी नाभि में जीभ डाली है।
सुशील: आह्ह।नहीं चरणदास जी।आप पहले हैं।

चरणदास : अब तुम मेरे कंधों पर रहके ही पीछे की तरफ़ लेट जाओ।हाथों से ज़मीन का सहारा ले लो।

सुशील चरणदास के कंधों का सहारा लेकर लेट गया।अब चरणदास के लिप्स के सामने सुशील का लंड था।चरणदास धीरे से अपने हाथ सुशील के निप्पलों पर ले गया।और बनियान के ऊपर से ही दबाने लगा।सुशील यही चाह रहा था।सुशील ने एक हाथ से अपना लुंगी ऊपर चढ़ा दिया और अपने लंड को चरणदास के लिप्स पर लगा दिया।चरणदास अंडरवियर के ऊपर से ही सुशील के लंड पर जीभ मारने लगा।
चरणदास : सुशील।अब तुम मेरी झोली मैं आ जाओ।
सुशील फ़ौरन चरणदास के लंड पर बैठ गया।उससे लिपट गया।चरणदास सुशील के लंड को ज़ोर ज़ोर से दबाने लगा।सुशील बार बार अपनी गांड चरणदास के लंड पर दबाने लगा।चरणदास ने सुशील का बनियान उतार के फेंक दिया और उसके निप्पलों को अपने मुंह में ले लिया।चरणदास ने बैठे बैठे ही अपनी लुंगी खोल के अपने अंडरवियर से अपना लंड निकला।सुशील ने भी बैठे बैठे ही अपनी अंडरवियर थोड़ी नीचे कर दी ।सुशील चरणदास के खड़े लंड पर बैठ गया।लंड पूरा उसकी गांड में चला गया।सुशील चरणदास के लंड पर ऊपर नीचे होने लगा।चुदाई ज़ोरो पर थी ।चरणदास : आह्हह। तेरी गांड कितनी अच्छी है।मेरी बांसुरी को बहुत मज़ा आ रहा है।
सुशील: चरणदास जी।आपकी बांसुरी मेरी गांड में बड़ी मीथा धुन बजा रही है।
चरणदास : अब उस यंत्र को छोड़।पहले मेरे लंड की जय कर ले।बहुत मज़ा देगा यह तेरे को।
सुशील: ऊऊआअ।प्प।चरणदास जी रात को तो आपके यंत्र ने कहाँ कहाँ घुसने की कोशिश की ।

चरणदास : मेरे राजा ।आअ।फ़िकर मत कर।स्स।तुझे जहां जहां घुसवना है मैं घुसाऊंगा

अब सुशील लेट गया और चरणदास उसके ऊपर आकर उसे चोदने लगा।साथ साथ वो सुशील के लंड को भी दबा रहा था।

चरणदास : आअह्ह।उस्स।आज के लिए तेरा पति बन जाऊ।बोल।

सुशील: आऐए।स्सस।ई।हाअन्न।बन जाओ।

चरणदास : मेरा बाण आज तेरी गांड को चीर देगा।

सुशील: आअह्हह।चीर दो।आआअह्हह्हह्हह्हह्ह।चीएर दो नाअ।आआह्ह

चरणदास : आअह्हह।ऊऊऊऊ
दोनो एक साथ झड गये और चरणदास ने सारा वीर्य सुशील की गांड के ऊपर झाड दिया।चरणदास सुशील के साथ लेट गया और उसके गालों को चूमने लगा।सुशील कपड़े पहन के घर चला आया।आज चरणदास ने उसे यंत्र बाँधने को नहीं दिया था।
रात को सोते वक़्त सुशील यंत्र को मिस कर रहा था।उसे चरणदास के साथ हुई चुदाई याद आने लगी ।सुशील ने अपना शोर्ट खोला और अपनी गांड को रगड़ने लगा।’चरणदास जी।मुझे क्या हो रहा है’।यह सोचने लगा।

गांड से हटा के अंगुली लंड पर ले गया।और लंड को रगड़ने लगा।’यह मुझे कैसा रोग लग गया है।टांगों के बीच में भी चुभन।चूतड़ के बीच में भी चुभन।ओह।’।
अगले दिन रोज़ की तरह 12:45 बजे वो चरणदास के घर पहुंचा ।दरवाज़ा खुलते ही वो चरणदास से लिपट गया।चरणदास ने जल्दी से दरवाज़ा बंद किया और सुशील को लेकर ज़मीन पर बिछी चादर पर ले आया।सुशील ने चरणदास को कस के बाहों में ले लिया। चरणदास के चेहरा पर किस्स पर किस्स किये जा रहा था।अब दोनो लेट गये थे और चरणदास सुशील के ऊपर था।दोनो एक दूसरे के होटों को कस कस के चूमने लगे।चरणदास सुशील के होटों पर अपनी जीभ चलाने लगा।सुशील ने भी मुंह खोल दिया।अपनी जीभ निकल के चरणदास की जीभ को चाटने लगा।चरणदास ने अपनी पूरी जीभ सुशील के मुंह में डाल दी ।सुशील चरणदास के दाँतों पर जीभ चलाने लगा।

चरणदास : ओह।सुशील।मेरी जान ।तेरी जीभ।तेरा मुंह तो मिल्क केक जैसा मीठा है।

सुशील: चरणदास जी।आअ।आपके होंठ बड़े रसीले हैं।आपकी जीभ शरबत है।आआह्ह।

चरणदास : ओह्हह।सुशील।

चरणदास सुशील के गले को चूमने लगा।चरणदास सुशील की शर्ट हटा के उसके निप्पल को दबाने लगा।उसके निप्पलों को कस कस के चूसने लगा।फिर चरणदास नीचे की तरफ़ आ गया।उसने सुशील की पेंट उतार दी

चरणदास : सुशील।आज अंडरवियर पहनने की क्या ज़रूरत थी ।

सुशील: चरणदास जी।आगे से नहीं पहनूंगा ।

चरणदास ने सुशील की अंडरवियर निकाल दी ।

चरणदास : मेरी जान ।अपनी गांड के द्वार का सेवन तो करा दे।
यह कह कर चरणदास सुशील की गांड चाटने लगा।सुशील के बदन में करंट सा दौड़ गया।सुशील पहली बार गांड चटवा रहा था।चरणदास ने सुशील को पेट के बल लिटा दिया और सुशील के चूतड़ पर किस्स करने लगा।सुशील के चूतड़ थोड़ी बड़े थे बहुत मुलायम थे ।

चरणदास : सुशील।मैं तो तेरे चूतड़ पर मर जाऊ।

सुशील: चरणदास जी।आह्ह।मरना ही है तो मेरे चूतडों के असली द्वार पर मरो।आपने जो यंत्र दिया था वो मेरे चूतडों के द्वार पर आकर ही फसता था।।

चरणदास : तु फ़िकर मत कर।तेरे हर एक द्वार का भोग लगाऊगा।

यह कह कर चरणदास ने सुशील को घोडा बनाया।और उसकी गांड चातने लगा।

सुशील को इसमें बहुत अच्छा लग रहा था।चरणदास सुशील का एस होल चाटने के साथ साथ उसके लंड को रगड़ रहा था।

सुशील: आअह्हह।चलो।चरणदास जी।अब सवाहा कर दो।ऊस्सशह्हह्हह्ह

चरणदास : चल।अब मेरा प्रसाद लेने के लिये तैयार हो जा।

चरणदास ने धीरे धीरे सुशील की गांड में अपना पूरा लंड डाल दिया।

चरणदास ने गांड में धक्कों की स्पीड बढ़ा दी ।

चरणदास : ।आह्हह।ओह्हह।सुशील।।मैं छूटने वला हूँ।

सुशील: आअह्हह्ह।मैं भी।आआ।ई।ऊऊऊ।अंदर ही ।गिरा।द।दो अपना।परसाद।

चरणदास : आअह्हह्हह।।

सुशील: आआह्हह्हह।अ।अह।
अह।अह।।अह।

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