हिंदी समलैंगिक सेक्स कहानी – स्टाकहोम सिंड्रोम – १

Click to this video!

हिंदी समलैंगिक सेक्स कहानी

मंत्री महोदय का एक उन्नीस वर्षीय लड़का था. चिकना, सुन्दर, जवान और मस्त. नाम था मयंक. देहरादून के किसी कान्वेंट स्कूल में पढ़ता था, और छुट्टियों में घर आता था. लेकिन बेचारा घर आकर बहुत बोर होता था, क्यूंकि उसे घर से निकलने की अनुमति नहीं थी- कारण था की मंत्री जी उस प्रान्त में थे जहाँ नक्सलवादी सक्रिय थे. हर समय उनपर और उनके परिवार वालों की जान का खतरा था.

एक बार छुट्टियों में मयंक और उसके दोस्तों ने घूमने का प्रोग्राम बनाया, एक नेशनल पार्क में. ये नेशनल पार्क उन्ही के प्रान्त में था, लेकिन ये बात उनके पिताजी को नहीं मालूम थी. चोरी छुपे ये प्लान बनाया गया था. मयंक ने अपने घरवालों को उदयपुर घूमने का प्रोग्राम बताया था. एक जवान लड़का इस तरह पाबंदियों से परेशान हो चुका था.

बेचारे की ज़िन्दगी में कुछ तो रोमांच आया.

कुल चार लड़को का ग्रुप, अपने साथ ढेर सारी शराब लेकर पार्क के अन्दर पुराने ज़माने की बनी ‘कॉटेज’ में रुका. उनका तीन दिन का प्रोग्राम था. शुरू के दो दिन तो घूमने फिरने में, शराब पीने में निकल गए. आखरी रात वो चारों मैदान में आग के किनारे बैठे थे. मयंक को पेशाब आई और वो झाड़ियों के पीछे हल्का होने चला गया.

काफी देर हो गयी लेकिन मयंक वापस नहीं आया. उसके दोस्त टुन्न थे. लेकिन जब दो घंटे बीत गए और मयंक दिखाई नहीं पड़ा, तब बाकी तीनो परेशान हो गए. और उन्होंने ढूँढना शुरू कर दिया. जिन कॉटेजों में वो ठहरे थे, वो ऊँची दिवार से घिरा हुआ था. किसी जंगली जानवर के आने का सवाल ही नहीं होता था.

अगली सुबह मयंक के दोस्तों की गाण फट चुकी थी. मयंक अभी तक लापता था. अब वो क्या करेंगे? क्या जवाब देंगे? स्कूल में क्या जवाब देंगे? मयंक के माँ-बाप को क्या बोलेंगे? वो मिनिस्टर तो हरामी का बच्चा था (वैसे सारे मिनिस्टर हरामी के बच्चे होते हैं) – अपने ज़माने में गुंडा रह चुका था. उनकी खाल उधेड़ लेगा.

अगले दिन पूरे देश भर से समाचार चैनलों को मसाला मिल गया था. अख़बारों की सुर्खियाँ चीख चीख कर मंत्री के लड़के के अपहरण की कहानी सुना रहीं थी.

मयंक पर नक्सलियों की निगाहें पहले से थीं. उनका उसे अगवा करने का प्लान उसी दिन बन गया था जिस दिन वो नेशनल पार्क में आया था. वैसे इससे बढ़िया जगह उनके लिए और नहीं हो सकती थी- उसे वहां से उठा ले जाना और जंगल में किसी आदिवासी गाँव में छुपा देना उनके लिए बहुत आसान था. उस बीहड़ स्थान में मोबाईल फोन के सिग्नल भी नहीं पहुंचते थे. सारे आदिवासी उनसे मिले हुए थे.

मयंक अँधेरे में पेशाब कर रहा था, की पीछे से उसे दो नक्सलियों ने दबोच कर बेहोशी की दवा सुंघा दी. उसके बाद उन्होंने उसे रात के घुप अँधेरे में किचन का सामान देने आई टेम्पो में डाला और वहां से ले गए. चेक पोस्ट पर और पार्क के मेन गेट पर बने थाने पर खड़े सिपाहियों को भनक भी नहीं लगी.

मयंक की जब आँख खुली तब अगले दिन की शाम हो चुकी थी. उसका सर घूम रहा था. उसने अपने आप को एक सरकंडे की बनी झोंपड़ी के अन्दर एक खटिया पर पड़े पाया. उसकी कुछ समझ में नहीं आ रहा था. हिम्मत करके वो उठा और दरवाज़े के तरफ लड़खडाता हुआ बढ़ा . दरवाज़ा खोलते ही वो धप्प से कच्ची ज़मीन पर गिर पड़ा.

उसे फिर होश आया तो सुबह हो चुकी थी. चिड़ियों के शोर से आसमान गूँज रहा था. अभी भी उसका सर झन्ना रहा था, लेकिन झन्नाहट पहले से कम थी. वो उसी खटिया पर पड़ा था. कमजोरी बहुत थी. हिम्मत करके उठा और झोंपड़े का दरवाज़ा खोल बाहर आया. उस झोंपड़े में वो अकेला था.

उसने अपने आपको एक गाँव में पाया. आस पास दो तीन कच्चे झोंपड़े थे और इन्हें घेरे घने-घने ऊँचे-ऊँचे पेड़. शायद वो नेशनल पार्क के आसपास ही कहीं था. उसे कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था.
“यह हिंदी समलैंगिक सेक्स कहानी इंडियन गे साइट डॉट कॉम के लिए विशेष रूप से है”
“अरे… उठ गया !!” कोइ पास में ही चीखा. बगल वाले झोंपड़े से एक आदमी ने झाँका. फिर वो लोटे में पानी लेकर मयंक के पास आया. “लो, हाथ मुंह धो लो.”
मयंक ने उसे गौर से देखा. कोइ ग्रामीण था. लेकिन उसकी समझ में कुछ नहीं आ रहा था. बेहोशी की दवा ने उसका दिमाग सुन्न कर दिया था. उसकी ये भी समझ नहीं आ रहा था की वो किसी से क्या कहे या पूछे. वो उस आदमी को और उस लोटे को ऐसे देख रहा हो जैसे कोइ ड्रग्स के नशे में हो.

“शायद अभी दवा का असर उतरा नहीं है, लो हाथ मुंह धो लो और आराम करो” उस आदमी ने मयंक को लोटा पकड़ा दिया. मयंक कोने में बैठ कर हाथ मुंह धोने लगा. जब उठा तब उस ग्रामीण की बीवी हाथ में चाय लिए खड़ी थी. “लो भैय्या, चाय पी लो. होश आ जायेगा”.
मयंक ने चाय का ग्लास ले लिया और धीरे धीरे चुस्कियां भरने लगा.
“अगर शौच के लिए जाना हो तो बताना.” और वो महिला वहां से चली गयी. मयंक अपने इर्द गिर्द गौर से देख रहा था. अब उसे होश आने लगा था. जब वो नेशनल पार्क में पेशाब करके मुड़ा था, उसे दो आदमियों ने घेर लिया.
“मयंक जी आप ही हैं?” उनमे से एक ने पूछा. मयंक को शराब चढ़ी हुई थी. उसने हाँ में सर हिला दिया. एक आदमी उसके पीछे चला गया. इससे पहले की मयंक कुछ पूछता, उसके पीछे खड़े आदमी ने उसे बेहोशी की दवा रुमाल में उड़ेल कर पीछे से उसके नथुने पर दबोच दी. मयंक ने एकबैक अपने आपको छुड़ाने की कोशिश की, लेकिन उसके सामने खड़े आदमी ने उसके हाथ पकड़ लिए.

उसे जब होश आया, तब वो इस गाँव में था- ना जाने कहाँ.

चाय पी कर को फिर से हाथ मुंह धोने लगा. वो ग्रामीण महिला चाय का ग्लास लेने आ गयी.
“ये कौन सी जगह है?”
मयंक के सवाल पर वो महिला मुस्कुरायी और बोली. “आप अभी थके हुए हैं. आराम कीजिये. आप को सब बता देंगे. आपको शौच जाना है?”
मयंक ने हाँ में सर हिला दिया.
“सुकेश… सुकेश्वा रे…. ” उस महिला ने किसी को आवाज़ लगायी. “कहाँ गया ई लड़का … सुकेश… ओ सुकेश…. !”
“भैया दो मिनट रुको.” मयंक से इतना कह कर वो महिला सुकेश को आवाज़ लगाती चली गयी.

मयंक फिर से झोंपड़ी के अन्दर खाट पर बैठ गया. उसने इर्द गिर्द नज़र घुमाई : कच्ची सी झोंपड़ी थी, ऊपर खपरैल की छत. मिटटी का कच्चा सा फर्श. कोने में टंगा कैलेंडर जिसमे दुर्गा जी का चित्र था. उसके पीछे दिवार पर तक बना हुआ जिसमे ढिबरी रक्खी हुई थी. मतलब के यहाँ बिजली भी नहीं थी. उसने उठ कर कैलेण्डर पर नज़र दौड़ाई. दुर्ग के किसी कपड़े की दुकान का था. मतलब की वो छत्तीसगढ़ में था.

“भैय्या चलिए” किसी ने पीछे से बोला. उसने पलट कर देखा तो एक तेईस-चौबीस साल का लड़का खड़ा था. रंग गेहुआं, कद काठी मज़बूत थी. लंबाई करीब पांच फुट दस इंच थी. मयंक से दो इंच लम्बा रहा होगा.
मयंक ने सवालिया नज़रों से उसे देखा. “मैं सुकेश … आपको शौच के लिए जाना होगा ना ? आइये…”
ये वही था जिसे वो महिला आवाज़ दे रही थी. मयंक उसके पीछे चल दिया.
“ये डब्बा ले लीजिये. मैं हैंडपंप चलता हूँ, आप पानी भर लीजिये.”
मयंक ने डब्बे में पानी भर लिया. सुकेश उसे युकलिप्टस की कतार के पीछे ले गया. वहां एक झुरमुट की तरफ इशारा करते हुए बोला “यहाँ चले जाइये. मैं यहीं खड़ा हूँ.”
“यह हिंदी समलैंगिक सेक्स कहानी इंडियन गे साइट डॉट कॉम के लिए विशेष रूप से है”
मयंक झाड़ियों के पीछे हल्का होने चला गया. थोड़ी देर जब वापस आया, तब सुकेश उसी तरह खड़ा था. उसके वापस आने पर उसे वापस ले जाने लगा.
“ये कौन सी जगह है… मैं यहाँ कैसे आया?” उसने सुकेश से पूछा.
सुकेश उसकी तरफ देख कर मुस्कुरा दिया. “आप कुछ दिनों के लिए हमारे मेहमान हैं.”
“अच्छा.. लेकिन मैं यहाँ कैसे आया? कौन सी जगह है ये?” मयंक ने अपना सवाल दोहराया.
“आप यहाँ कैसे आये ये तो मुझे भी नहीं मालूम. आप इस वक़्त हमारे गाँव दरवालिया में हैं, ज़िला पड़ता है दुर्ग.” सुकेश ने जवाब दिया.
“लेकिन… लेकिन मुझे यहाँ लाया कौन? और क्यूँ लाया?” मयंक ने फिर पूछा.
“आप दो रात पहले यहाँ लाये गए थे. हमें तो बस इतना मालूम है की आप हमारे मेहमान हैं और कुछ दिन यहाँ रुकेंगे. इसके आगे मुझे कुछ नहीं मालूम.”
मयंक की कुछ समझ में नहीं आ रहा था. शायद उसका अपहरण हुआ था. इसीलिए उसे अकेले बाहर जाने नहीं दिया जाता था.

वो दोनों वापस लौटे तो सुकेश ने उसका हाथ धुलाया. “आप नहायेंगे क्या?” सुकेश ने पूछा.
मयंक ने ‘हाँ’ में सर हिला दिया. सुकेश भागा भागा गया और कहीं से एक पतला सा तौलिया ले आया.
“आइये..”
सुकेश उसे एक कुँए के पास ले गया. वहां रहट चल रही थी. मयंक चौंक गया. उसने कुँए पर चलती रहट ज़िन्दगी में पहली बार देखी थी. उसने कुआँ ही पहले कभी नहीं देखा था.
“अरे, यहाँ ट्यूब वेल नहीं होता क्या?” मयंक ने अचम्भे में पूछा.
सुकेश हंस दिया. “ट्यूबवेल के लिए हमारे पास पैसे नहीं होते. ना यहाँ पर बिजली है. हम तो बस इन दो बैलों की जोड़ी से काम चलते हैं.” उसने रहट चला रहे दो बैलों की तरफ इशारा किया.

सुकेश ने मयंक को लोटा थामा दिया और हौज़ दिखा दी जिसमे कुँए का पानी आ रहा था. मयंक को बहुत रोमांच आया. उसने अपने कपड़े उतारे, सिवा जांघिये के और हौज़ के किनारे बैठ कर लोटे से नहाने लगा. सुकेश उसकी निगरानी कर रहा था. साथ में हाथ चलने वाले से भी बातें कर रहा था.

कुँए के ठन्डे पानी से नहाकर मयंक को बहुत मज़ा आया. आस पास घने-घने पेड़, लेह-लहाते खेत, खुला आसमान और उसके बीच में हौज़ में ठंडा ठंडा पानी. ये भी एक तरह का आनंद था.
मयंक जब नहा चुका, तब सुकेश खेतों के बीच से होता हुए उसे वापस उसी झोंपड़े में ले गया.
“आपको भूख लगी होगी. आपके लिए भोजन लता हूँ.” इतना कह कर सुकेश बगल वाले घर में गायब हो गया.

मयंक को वास्तव में भूख लगी थी, आखिर दो दिन से उसने कुछ नहीं खाया था. वो कमजोरी में लडखडाता हुआ चल रहा था. वो उसी खाट पर पसर गया.
थोड़ी देर में सुकेश थाली लेकर आया. अरहर की दाल, भिन्डी की सब्जी, रोटियां और चावल.
मयंक खाने पर टूट पड़ा. सुकेश समझ गया की बेचारा दो दिन से भूखा है. भाग कर गया और कुछ और रोटी-सब्जी उसके लिए ले आया.

मयंक ने सब साफ़ कर दिया. सुकेश ने उसके फिर से उसके हाथ धुलाये और पानी पिलाया. उसे फिर नींद आने लगी और वो खाट पर फिर से पसर गया.
जब उसकी नींद टूटी तो शाम हो चुकी थी. अब शरीर में थोड़ा दम आ गया था. झोंपड़ी पर लगे दरवाज़े को हटा कर बाहर निकला और गाँव का जाएज़ा लेने लगा. वो पूरी तरह खो चुका था. सब कुछ भूल-भुलैया जैसा, हर तरफ खेत खलिहान, पेड़ों के झुरमुट और जंगल. अगर वो वहां से भाग भी जाये तो रास्ता नहीं ढून्ढ पायेगा. तभी उसे बगल वाले झोंपड़े से रेडियो की आवाज़ आई:

“ये आकाशवाणी का रांची केंद्र है… अब आप सबा परवीन से समाचार सुनिए…”
समाचार शुरू हुए..
“छत्तीसगढ़ के गृह मंत्री के पुत्र मयंक का अभी भी पता नहीं चल पाया है. गत बीस अप्रैल को नक्सलवादियों ने उसे कान्हा अभयारण्य से अगवा कर लिया और फिरौती में रांची, रायपुर और राजामुंदरी के कारागार में बंद अपने साथियों की रिहाई की मांग कर रहे हैं. मयंक को ढूँढने में छत्तीसगढ़ पुलिस, केंद्रीय रिज़र्व पुलिस और मध्य प्रदेश पुलिस ने दिन रात एक कर दिया है….”

मयंक का खून सूख गया. अन्दर की सांस अन्दर, बाहर की बाहर. उसका शक सही निकला. उसे नक्सलियों ने अगवा कर लिया था. उसे चक्कर आने लगा. भाग कर उसी झोंपड़े में चला गया और फिर से ख़त पर पसर गया. दो घंटे बाद उसकी नींद किसी ने तोड़ी. सुकेश था. “मयंक भइय्या, चलिए खाना खा लीजिये.”

रात हो चुकी थी. उसे समय का अंदाज़ा नहीं था. ना ही उसने पूछने की हिम्मत जुटाई. चुप चाप सुकेश के पीछे बगल वाले झोंपड़े में चल दिया. अंदर गया तो वही महिला मिटटी के चूल्हे पर जुटी रोटियां सेक रही थी. उसके पास चटाई पर दो बच्चे और उसका पति पालथी मारे बैठे थे. बीच में लालटेन जल रही थी.
“यह हिंदी समलैंगिक सेक्स कहानी इंडियन गे साइट डॉट कॉम के लिए विशेष रूप से है”
“आओ मयंक भैय्या. भोजन करो.” चटाई पर बैठे आदमी ने कहा. लगभग अट्ठाईस-तीस साल का रहा होगा, चेरा-मोहरा सुकेश से मिलता जुलता. शायद सुकेश का बड़ा भाई था, और वो महिला सुकेश की भाभी.
“भैया… गरीबों का खाना है…. आप बड़े आदमी हैं, शायद आपको पसंद ना आए.” उस महिला ने मुस्कुराते हुए कहा.
मयंक अभी भी सदमे में था. भगवान जाने ये लोग उसका क्या करने वाले थे- कैसे उसे मारते, कैसे उसकी लाश फेंकते.
बिना कुछ कहे मयंक पास ही पड़े आसान पर बैठ गया. और उसके बगल में सुकेश.

“ये मेरा छोटा भाई है. सुकेश. आपका खयाल रखने को इसे बोला है.” उस व्यक्ति ने सुकेश की तरफ इशारा किया.
“लीजिये भैया” उस महिला ने मयंक के सामने थाली परोस कर रख दी. मयंक हिचकिचा रहा था.
“आप शुरू करिए, हम भी अभी शुरू करते हैं.” सुकेश के बड़े भाई ने कहा.
मयंक ने खाना शुरू किया. इतने में सुकेश की भाभी ने उसके लिए और दोनों बच्चों के लिए भी थाली लगा दी. और सब खाने में जुट गए.
“भैया शर्माना मत. किसी चीज़ की ज़रुरत हो बताना. इसे अपना ही घर समझो.” उस व्यक्ति ने मयंक की झिझक दूर करने के लिए कहा. वो समझ रहा था की मयंक को उसके अपहरण के बारे में मालूम नहीं था. लेकिन मयंक रेडियो पर खबर सुन चुका था. वो शर्मा नहीं रहा था. वो डर रहा था.

“भैया हम छोटे लोग हैं, लेकिन आपका पूरा खयाल रखेंगे.” सुकेश की भाभी ने कहा.
सबने भोजन खत्म किया. वो व्यक्ति आँगन में खाट पर बैठ कर हुक्का पीने लगा.
“सुकेश… ” उसने सुकेश को आवाज़ दी. “ऐ सुकेश… कहाँ चला जाता है ये लड़का… आवारा कहीं का…”
सुकेश को आवाज़ लगाते लगाते वो दरवाज़े पर खड़ा हो गया.
दो मिनट में सुकेश हाज़िर हो गया.
“कब सुधरेगा रे? जा मयंक के सोने का इन्तेजाम कर… बेचारा अभी भी कमज़ोर है. जल्दी कर…” सुकेश किसी आवारा कालेज के लड़के की तरह मस्ती से टहलता हुआ दालान में गया और चादर, गद्दा वगैरह निकलने लगा. मयंक उसी जगह चूल्हे के पास बैठा हुआ था.
“मयंक भैय्या आइये.” सुकेश ने उसे बुलाया.

“मयंक भैय्या, अगर आपको कोइ समस्या तो सुकेश से बताइयेगा, बिना झिझके. आपके पास ही रहेगा.” सुकेश के भाई ने उससे कहा.
मयंक पहले वाले झोंपड़े में, जिसमे वो पहले से था, सुकेश के पीछे पीछे चला गया. अन्दर ढिबरी की रौशनी में देखा तो दो खाट लगी हुईं थी.
“मयंक भैय्या, वो आपका पलंग है, ये मेरा. अगर रात में आपको पेशाब के लिए जाना हो तो मुझे जगा दीजियेगा. और ये लोटे में पानी रखा है, अगर आपको प्यास लगे तो.”
मयंक बिना कुछ कहे चारपाई पर बैठ गया.
“ढिबरी बुझा दूँ?” सुकेश ने पूछा.
“हाँ बुझा दीजिये.”
दोनों लेट गए. “आप देहरादून में पढ़ते हैं ना?” सुकेश ने मयंक से पूछा.
“हाँ”
“अच्छा… वहां आप अकेले रहते हैं?” सुकेश को मयंक में बहुत उत्सुकता थी. वो हैदराबाद में अख़बार बेचने का काम कर चुका था. उसे बड़े शहर की ज़िन्दगी बहुत मस्त लगती थी. मयंक ने अपने बोर्डिंग स्कूल की ज़िन्दगी के बारे में सुकेश को बताया. कुछ देर दोनों यूँ ही बात करते रहे, फिर ना जाने कब मयंक की आँख लग गयी.

सुबह उठा तो सुकेश की भाभी पहले की तरह उसे चाय देने आई. सुकेश कहीं गायब था. भाभी ने उसे शौच करने के स्थान दिखाया. थोड़ी देर में सुकेश भी आ गया, और मयंक को अपने साथ उसी कुँए पर नहाने के लिए ले गया. इस बार सुकेश भी नहाने की तैयारी से आया था. कुँए पर पहुँच कर सुकेश ने मयंक को लोटा थमा दिया, और खुद कोने पर बैठ गया.
“आप पहले नहा लीजिये, मैं बाद में नहा लूँगा.”

मयंक सिर्फ जांघिये में नहाने लगा. उसे ऐसा करने अजीब लग रहा था- आजतक वो खुले में नहीं नहाया था.

अगले भाग जल्द ही पोस्ट किया जाएगा …………

Comments


Online porn video at mobile phone


desi groupsexHD Gay xxx desidesigaypornpicsdesi gay hottie nudeDesi gay sex picindian desi mard nudeindian nude boysNaked two lungi men having a foreplay sex videopornography of indian desi gay boys sexindian small cocksdesi fat mota cock cum videosx vedios Indian men outdoor jerking see sexy girlsindian boy asshole selfi picturehad gay xxx bada land walaIndian nude daddiesindia blue sexporn boy indiaअन्तर्वासना गे बॉय क्सक्सक्स पोर्न वीडियोmale indians sex.comfuckincest handjob yahoounle ka sath gay sex ke pakistani khaniIndian gay horny Uncleindian gay sexBoy naked masturbationreal India dicks nudeporn gay dick fuck storiesuncle oil shishi gandIndian gay cock photokerala gay nakedSexVideoGayKeralanaked indian hunk video indiangaysiteDesi gayIndian self nakedindian gay ass sexGay sex kahani with photossexy nude in tamil nadusouth indian gay sexIndian gay boys xxxindian boy showing his dick to his girlfrienddesi boys nude picturesdesi gay sexXXX GAY INDIA 2017mujhe gand marwane ka chaska pad gayagay indian asslickingbig indian cocktamilhotcocksindian hunks nudegay gaandu londebaajiindiangay.com nude picstwink indian boy nudedesi mature gay UncleIndian gay sex boy desiHot Indian mens xxx penisdesi unkcle nude imagexnxx tangin utha kdesi gay site mature unckel orual baddy raw fuckdelhi gay man xxx kahanidick indianm2m clvb mota lundgay sex kahaniDesi Gay Sex Indiyan boys nekeddesigay pornindian male nude hotbeeg men sexy video natural nude : desi gaygayy xx video big ass big bottamindian gay pornfucking indian gayshuge indian penisMale lungi nudehot hunk gay sexroomadult indian gay sex picturemuscled gays sex indiangay chudai kahanixxxn velage boy to boygay fucking indian