गान्डू चुदाई कहानी – ब्लॅक डाइमंड – १

Click to this video!

एक लड़का था, हट्टा-कट्टा, लम्बा चौड़ा, लम्बाई छः फुट चार इंच, 56 इंच चौड़ी छाती, विशालकाय मांसल भुजाएँ और जाँघें, छाती, जाँघों व हाथ-पाँव पर बाल, यानि डील-डौल लाखों में एक और नाम था अर्जुन यादव।
लेकिन बेचारा एक चीज़ से मात खाता था- उसका रँग काला था। काला यानि तारकोल की तरह काला।

रहने वाला छत्तीसगढ़ का था। अर्जुन के घर में सब लम्बे चौड़े और काले थे, लेकिन उसने अपने ही घरवालों को कद-काठी और रँगत में पीछे छोड़ दिया था। आप अब स्वयँ ही कल्पना कर सकते हैं- कद काठी क्रिस गेल Kriss Gayle के जैसी, रँग अजन्त मेंडिस के जैसा और शकल चतुरंग डि सिल्वा  के जैसी- काला, हट्टा-कट्टा, भीमकाय दैत्य।

और एक बहुत ज़रूरी बात- अर्जुन को लड़के बहुत पसंद थे। उसे लड़कों की गाण्ड मारना, उनके होंठ चूसना, उनसे अपना लण्ड चुसवाना, उनके साथ लिपटना-चिपटना बहुत पसन्द था।

उसे उसके गाँव में लड़के आसानी से मिल जाते थे- उसने अपने चाचा लड़के की गाण्ड मार-मार कर ढीली कर दी थी। गाँव के पटवारी का लड़का, उसके घर में बैलगाड़ी हाँकने वाला उन्नीस साल का लड़का, डाकिये का लड़का- सब उसकी जवान, काली हवस का शिकार बन चुके थे, एक नहीं कई-कई बार।

इन सबों ने राहत की साँस ली जब अर्जुन की भर्ती केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल यानि की सी आई एस एफ में हो गई।

अपनी सी आई एस एफ की ट्रेनिंग के दौरान अर्जुन ने बास्केटबॉल खेलना शुरू किया। वह सी आई एस एफ की बास्केटबाल टीम का चैंपियन था।


साथ ही वह नियमित तौर पर जिम भी जाने लगा, उसका शरीर और निखर आया… विनीत को खेल समारोहों जैसे राष्ट्रीय खेल, एशियाड वगैरह में भी भेजा जाता था, यानि हमारा अर्जुन यादव हीरा था, बस उसका रँग कोयले जैसा था।

ट्रेनिंग खत्म होने के कुछ समय बाद अनिल की पोस्टिंग हमारी राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में हुई। पहले उसे इन्दिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर तैनात किया गया और फिर शहर के व्यस्ततम मेट्रो स्टेशन, कनॉट प्लेस पर।

अर्जुन पहली बार किसी महानगर और उत्तर भारत आया था। इतने बड़े शहर की चकाचौंध में उसकी आँखें चुँधिया गईं।
गोरे-गोरे, सुन्दर लड़के-लड़कियाँ, तीखे नैन-नक्श… कुछ तो उसके भीमकाय काले शरीर से डर जाते थे लेकिन उसके डील-डौल और रंगत से कुछ लोग आकर्षित भी होते थे- था तो अर्जुन लाखों में एक लड़का।
और अगर गौर से देखा जाये तो उसका कोयले जैसा काला रँग उस पर बहुत जंचता था, उसे और मरदाना बनाता था।
ऊपर से सी आई एस एफ की वर्दी में अपनी ए के 47 लिए वो तो कहर ढाता था।
बहुत सारी लड़कियों ने उसे लाइन भी मारी।

अर्जुन के रहने का इंतज़ाम दिल्ली के साकेत इलाके में सी आई एस एफ कैंप में किया गया था, उसके लिए बहुत आसान हो गया था – मेट्रो स्टेशन उसके कैम्प से लगा हुआ था – मेट्रो से ड्यूटी करने जाता, और उसी से वापस आता।
और सी आई एस एफ के कैम्प के पास ही पॉश साकेत कॉलोनी थी – वहाँ सम्भ्रान्त वर्ग के लोग रहते थे।

अर्जुन सुबह-सुबह जब जॉगिंग के लिए जाता, उसकी नज़र सुन्दर-सुन्दर लड़कों पर पड़ती, जो उसी की तरह व्यायाम कर रहे होते। शाम को या फिर छुट्टी के दिन भी उसे खूब आँखें सेकने का मौका मिलता।

इन्ही लड़कों में से एक था विनीत, उम्र बीस साल, वेंकी कॉलेज से बी कॉम कर रहे थे, रहने वाले अल्मोड़ा के थे, उनके पिताजी पँजाब नेशनल बैंक में मैनेजर थे।
थे तो अल्मोड़ा के, लेकिन काफी सालों से दिल्ली में थे और सी आई एस एफ कैम्प के पास ही एक कोठी के निचले हिस्से में रहते थे।

विनीत बहुत सुन्दर लड़का था- गोरा चिट्टा रँग (उत्तराँचल का था, तो स्वाभाविक ही था), तीखे नैन-नक्श, गुलाबी गाल, काली-काली रसीली बड़ी आँखें, तीखी-तीखी नुकीली भँवे, सुन्दर-सुन्दर पतले गुलाबी होंठ, इकहरा शरीर, जिस्म पर एक बाल नहीं, सिवाए झांटों के। लंबाई पांच फुट आठ इंच।
जब मुस्कुराता था, उसके गालों में गड्ढे पड़ जाते थे, ऐसा लगता था जैसे जान ले लेगा।
कुदरत ने उसे फुर्सत में और बहुत प्यार से बनाया था।
विनीत अपने कॉलेज में बहुत शरारती और चुलबुला था। लड़के और लड़कियों, दोनों में पॉप्यूलर था।

लेकिन विनीत का भी एक अंदरूनी सच था- उसे भी लड़के पसंद थे। स्कूल में अपने दोस्तों के साथ उसने खूब होमोसेक्स हरामीपना किया था। कॉलेज में आते-आते यही हरामीपना अब हद पार चुका था। उसने अपने दोस्तों और स्कूल के बाकी सीनियर लड़कों के साथ गे ब्लू फिल्में देखना शुरू कर दिया था, वो उनके लण्ड भी चूसता था, उनसे ग्रुप में गाण्ड भी मरवाता था- यानि की एक लड़का पीछे से उसकी गाण्ड मारता था, दूसरा उसके मुंह में अपना लण्ड देकर चुसवाता था।
अब उसके साथी लड़के उससे उनकी गाण्ड भी चाटने को कहते। विनीत इस सब में इतना मगन हो चुका था कि उसे लड़कियाँ बिल्कुल भी आकर्षित नहीं करती थी, वो सिर्फ लड़कों के बारे में कल्पना करता था और लड़के भी उसे खूब पसंद करते थे, उसके दीवाने थे!

अर्जुन पर विनीत की नज़र, या यूँ कहें की अर्जुन और विनीत की नज़र एक दूसरे पर एक रविवार की सुबह पड़ी।
विनीत पास ही मदर डेयरी से दूध लेने पैदल जा रहा था और अर्जुन सामने से जॉगिंग करता हुआ आ रहा था – उसने सी आई एस एफ की सफ़ेद पोलो टी शर्ट, खाकी नेकर और स्पोर्ट्स शूज़ पहने हुए थे। उसकी काली-काली, बालदार, माँसल जाँघें पूरी दिख रही थी। पूरा शरीर पसीने में लथपथ था, हांफता हुआ उलटी दिशा से आ रहा था।
अर्जुन की कद काठी और रंगत ऐसी थी कि हर किसी की नज़र उसपर जाती थी। लिहाज़ा विनीत की नज़र उस पर गई और वैसे भी विनीत की नज़र मर्दों और लड़कों पर ज़रूर टिकती थी।
और अर्जुन को भी लड़के पसंद थे, दोनों की एक दूसरे पर तो नज़र पड़नी ही थी, सो पड़ी।

दोनों ने एक दूसरे को निहारा और अपने-अपने रस्ते हो लिए। अगली सुबह फिर विनीत को दूध लेने भेजा गया। और अर्जुन तो रोज़ दौड़ लगाता था। दोनों की नज़र फिर मिली और फिर दोनों अपने रस्ते हो लिए।

दो दिन बाद शाम को विनीत कनॉट प्लेस से अपने दोस्तों के साथ मेट्रो से साकेत लौट रहा था। अर्जुन यादव स्टेशन के गलियारे पर बाकी सुरक्षाकर्मियों के साथ अपनी ए के 47 लिए तैनात था, दोनों की नज़र फिर एक दूसरे पर पड़ी, दोनों ने मन-ही-मन एक दूसरे को पहचाना और पसंद भी कर लिया।
विनीत ने इतना तगड़ा, बाँका लड़का पहले कभी नहीं देखा था।

अर्जुन अपनी वर्दी और बन्दूक के साथ बहुत जच रहा था। विनीत को अब ध्यान आया कि क्यों वो उसे कैम्प से पास देखता था। जहाँ कुछ लोग अर्जुन के रंग की वजह से उससे डर जाते थे, वहीं विनीत को उसकी रँगत और डील-डौल ने उसका कायल कर दिया।
विनीत के लिए अर्जुन किसी कामदेव से काम नहीं था।

मेट्रो में सारे रास्ते विनीत अर्जुन के बारे में सोचता रहा, उसके बारे में कल्पना करता रहा। घर आते-आते विनीत खोया खोया सा हो गया, शायद उसे अर्जुन से प्यार हो गया था।

रात भर विनीत अर्जुन के बारे में सोचता रहा – उसका नाम क्या होगा, कहाँ का रहने वाला होगा, उसे तो आम लड़कों की तरह लड़कियाँ पसन्द आती होंगी। उसे कम से कम उसका नाम यूनिफार्म पर लगे बिल्ले से पढ़ लेना चाहिए था।
उसने अपने आप को कोसा लेकिन उसकी भी कोई गलती नहीं थी – वो सुरक्षा जांच की लाइन में लगा था (जहाँ अर्जुन तैनात था), और भीड़ भी बहुत थी – उसे मौका ही नहीं मिला।
विनीत ने गौर किया कि वो अर्जुन को रोज़ सुबह के समय देखता था जब वो दूध लेने जाता था।
उसने तय किया कि अगली सुबह वो फिर जायेगा, शायद वो सी आई एस एफ का बाँका जवान फिर से मिल जाये !

उसने अपने मोबाइल फोन में अलार्म लगाया और अर्जुन के बारे में सोचता हुआ सो गया।
अगली सुबह अलार्म बजने पर फटाक से उठ गया – लपक कर हाथ मुँह धोये, ब्रश किया और मम्मी से पैसे लेकर दूध लेने चल दिया। सारे रास्ते उसकी निगाहें अर्जुन को ढूँढती रहीं, लेकिन उसे अभी तक अपना हीरो दिखा ही नहीं।

उसने दूध खरीदा और पैसे देकर जैसे ही पीछे मुड़ा, उसका बाँका जवान ठीक उसके पीछे खड़ा था, उसी जॉगिंग वाले हुलिये में – वो भी दूध लेने के लिए आया था। दोनों की नज़रें मिलीं, इस बार करीब से और दोनों ने एक दूसरे को पहचाना। लेकिन कोई किसी से कुछ नहीं कह पाया – बात कैसे शुरू होती?

इस बार हमारे दैत्य ने भी विनीत पर ‘एक्स्ट्रा’ गौर किया – कितना सुन्दर लड़का था – गुलाबी-गुलाबी, गोरे-गोरे गाल, नाज़ुक होंठ, तीखी भँवे जैसे उन्हें किसी ने तराश कर नुकीला कर दिया हो।

अर्जुन को देखकर विनीत भी बहुत खुश हुआ और मन ही मन मुस्काया। वो दूध का पैकेट लेकर जाने लगा जाने लगा, अर्जुन ने पीछे से उसकी गाण्ड का मुआयना किया – विनीत ने भी उस वक़्त नेकर पहनी हुई थी – कितनी मस्त गोल-गोल गाण्ड थी साले की! कितनी मुलायम होगी !! यही सब सोच हुए अर्जुन ने भी अपना दूध लिया और अपने कैंप की तरफ चल दिया।

थोड़ी देर अगर वो विनीत को देखता तो उसका लण्ड खम्बे की तरह खड़ा हो जाता।

दो-तीन दिन यूँ ही बीत गए। विनीत के इम्तहान शुरू हो गए, विनीत की भी शिफ्ट भी बदल गई- अब वो सुबह पाँच बजे रिपोर्ट करता था और शाम को व्यायाम करता था।

इम्तहान ख़त्म होने की बाद विनीत और उसके दोस्तों ने पार्टी करी, वहीं कनॉट प्लेस पर। सारे लौण्डे-लपाटे पार्टी के बाद बियर में टुन्न होकर अपने-अपने घर जाने लगे, विनीत भी मेट्रो से जाने लगा।
उसने सिक्योरिटी चेकपोस्ट पर अपने बाँके को ढूँढा लेकिन वो वहाँ नहीं था, थोड़ा उदास होकर प्लेटफार्म पर गया और ट्रेन में चढ़ गया। हमेशा की तरह खचा-खच भीड़ थी।
ट्रेन के कोच में घुसा तो देखा कि उसका बाँका जवान ठीक उसी कोच में पहले से था !

उसकी तो बाँछें खिल गईं, जैसे उसे कोई खोया हुआ सितारा फिर आसमान में दिख गया हो।
भीड़ के धक्कम-धुक्की से अर्जुन विनीत के बिल्कुल करीब आ गया। विनीत उस समय यूनिफार्म में नहीं था, उसकी छुट्टी थी। अर्जुन ने विनीत को पहचान लिया।
कैसे नहीं पहचानता?

उसका मन हुआ विनीत से बात करने का लेकिन वो थोड़ा झिझका – वो उसके जैसे काले कलूटे राक्षस से क्यों बात करेगा? कितना चिकना लड़का था – वो तो लड़कियाँ पटाता होगा – खुद कितना सुन्दर था, उसकी गर्लफ्रेंड भी सुन्दर होगी।

वो इसी सब उधेड़बुन में लगा हुआ था कि मेट्रो ट्रेन चालू हुई और धक्का लगा। धक्का लगा, और विनीत और अर्जुन एक दूसरे से लड़ गए। दोनों के मुँह से एक साथ निकला ‘सौरी’. बस इसी ‘सौरी’ से दोनों की बात शुरू हो गई।
दोनों ने मन ही मन भगवान को धन्यवाद दिया ट्रेन के धक्के के लिए।

‘आप साकेत में रहते हैं ना?’ अर्जुन ने बात शुरू की।

‘हाँ, घर ही जा रहा हूँ।’ विनीत ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया। शायद मैंने पहले भी बताया हो – विनीत की मुस्कान बहुत प्यारी थी। जैसे फूल झड़ते हों, ऊपर से उसे बियर का सुरूर भी चढ़ा था, उसकी मुस्कान ने विनीत पर कटार चला दी।
‘आज सी पी घूमने आये थे?’

‘हाँ, आज सारे दोस्तों ने घूमने का प्रोग्राम बनाया था। आप सी आई इस एफ में हैं न?’ विनीत उसी अदा से मुस्कुराता हुआ बात कर रहा था।
‘हाँ, आज मैं भी घूमने आया था। आपके पिताजी क्या करते हैं?’ अर्जुन ने उसके बारे में पूछना शुरू किया।
‘बैंक में मैनेजर हैं।’

ट्रेन में भीड़ बहुत थी, भीड़ की हलचल से दोनों करीब आ गए। दोनों आमने सामने खड़े थे, धक्का लगने पर दोनों की कमर, छाती एक दूसरे से छू जाती थी, बहुत मज़ा आ रहा था दोनों को।
अर्जुन का तो लण्ड खड़ा होकर फुँफकार मार रहा था, उसका बस चलता तो चलती मेट्रो में, सबके सामने विनीत को दबोच कर चोद देता।

दोनों में बातचीत जारी थी :
‘आप तो इतने स्मार्ट हैं, यहाँ गर्लफ्रेंड के साथ पार्टी में आये थे?’ अर्जुन ने मुस्कुराते हुए पूछा।

विनीत शर्मा गया, ऐसे जैसे उसे अर्जुन ने ‘प्रोपोज़’ किया हो।
‘नहीं मेरी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है। ‘ खुमार भरी आँखों से विनीत ने मुस्कुराते हुए कहा।

‘मैं मान ही नहीं सकता।’

‘अरे सच में… आप बताइये आप की कोई गर्लफ्रेंड है? आप तो इतने हैण्डसम हैं, आपको तो बहुत लड़कियाँ लाइन देती होंगी? विनीत ने बात पलटी।

अब तक ट्रेन में भीड़ कम हो गई थी, लेकिन दोनों उसी जगह, हैंडरेल का सहारा लिए, खड़े हुए बतिया रहे थे।

‘मेरी भी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है।’ अर्जुन का तो मन था कि कह दे ‘तुम हो न मेरी गर्लफ्रेंड…’

थोड़ी ही देर में साकेत स्टेशन आ गया, दोनों को यहीं उतरना था।
स्टेशन से बाहर आते-आते दोनों ने मोबाइल नंबर की अदला-बदली की, बात यहाँ तक बढ़ गई कि दोनों विदा लेते समय दूसरे के गले लगे।

गले लग कर दोनों एक सुखद अनुभूति हुई – इस अनुभूति में सिर्फ हवस ही नहीं थी, बल्कि उससे बढ़ कर एक भावना थी। दोनों को लगा जैसे दोनों को थोड़ी देर और उसी तरह लिपटे रहना चाहिए था, उन्हें ऐसा लगा जैसे उन्हें और पहले ही एक दूसरे से लिपट जाना चाहिए था।

उस रात न विनीत को नींद आई ना सौरभ को। दोनों रात भर एक दूसरे व्हाट्सऐप से बतियाते रहे।

दोनों को एक दूसरे से प्यार हो गया।
अब तक दोनों सिर्फ सेक्स करते आये थे, यह उनका पहला प्यार था… वैसे भी लड़कपन में बहुत जल्दी प्यार होता है।
गान्डू चुदाई कहानी जारी रहेगी।

Comments


Online porn video at mobile phone


sex xxx gay men desi India mobaildesi porn sitedesi boy dicknaked pics of gay boys from indiagand ki mast image gayindian mature gay uncle nudeIndian boys sex land photos hdwww.hindi gay sex adult story with jijudaday gaysex storyhddesi gay group fuck videoindian gay sex videosdesi naked gay indian uncleshot desi mard nude cocktamil man nude imagespakistani uncles porn videos in tumblrTamil muscle guy nude imagesBoys sex with boys pron at nightxxxdesi boys gays lands indian train sexinda.me.kaghaz.chkne.wali.pornindian sexphotolandbig indian penishot indian gays porn videosmalayalam heros men sexy nude picsHot gay sex lundTamil Gays nudeDESI BOY SEX GAYSpashtoon gay twinksindian heroes gay cockxvideo desi gay man boybollywood patanxxx gayes 2017call karke bulaya gay xvideosgay sexlungi sextelugu andrasaree hot sex imagesindian gay nude cocks photosLambe mote lundo se gay chudai storyporogi-canotomotiv.ruhindu naked pornगाडु चुदाईsexbidopunjabidesinudemenindian gay coock photosdesi man nudeindian gay porndesioldmangaypornmera pahla sex storyindian tamil sex vidionude desi fucks youtubenajik najik hatho se chut gaytamil policemale nudeindian gay dad sexboys land sexindian gay jija sex images with saladesi gay sex Indian gay sitenude shemale indian full hdbig Indian cocksexboysdesi.comIndian gay mastrubation in wash roomdesi gay fucking picspapa beta gay sex hindigay hot sex image cum shot indianXxx sexy gay mens hot old uncleslund pic dickgay sex chota bacha ladkawww. desi boy gay sex.comwww.gay sex desi sex stories ketto mai or gaon mai videosouth indian desi dads with lungi at home sexindian monster cockBaf31.ru ... Mature dadsDesi nude mensdesi gay sex of kolkatabrahmin men nude gay fuckdesi nude young guy lunddick long xxx picture indian boysindian gay sexy nude boys picdesi gay orgyxxx video mms up 13 yars lave pakada gaynude india boy bodysexy gay boss and gay employees chudai storyIndian gay jerkindian men toilet porndesi boy penis picDesigroupgaysexnaked photos of indianbearmangay big bend cock photoxxx group sex boyssouth indian uncle xxx sex photoswww indian desi nude boys big penis photo